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Political Tussle Plays Out in Court? Former IPS Officer Bharati Ghosh’s Husband Arrested


विक्रम दास/स्राबंति साहा. कोलकाता: कलकत्ता हाई कोर्ट के बाहर एक बेहद नाटकीय घटनाक्रम के तहत पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष के पति एमएवी राजू को गिरफ्तार कर लिया गया. राजू अपनी पत्नी और पांच अन्य पुलिसकर्मियों के साथ जबरन वसूली के एक मामले के आरोपी हैं. उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी थी, हालांकि कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. घोष इस मामले के मुख्य आरोपी है, और अभी तक फरार थे. ये मामला नोटबंदी के समय 40 करोड़ रुपये के पुराने नोटों को जबरन आभूषणों में बदलने के लिए अनुचित दबाव बनाने का है.  

भारती घोष उस समय पश्चिमी मिदनापुर की एसपी थीं और ये आरोप लगने के बाद उन्होंने दिसंबर 2017 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया. एक समय में उन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता था. 

सीआईडी ने की पूछताछ 
पश्चिम बंगाल सीआईडी के डीआईजी निशाद परवेज ने कहा, ‘भारती घोष के पति एमएवी राजू की अग्रिम जमानत का मामला को माननीय हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.’ सीआईडी के कोलकाता स्थिति मुख्यालय में राजू के साथ पूछताछ की गई और उन्हें बुधवार को मिदनापुर कोर्ट में पेश किया जाएगा. इस बारे में अभी बचाव पक्ष के वकील ने अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. 

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जस्टिस बनर्जी ने राजू की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस के पास उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पर्याप्त कारण हैं. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. ये मामला इस साल फरवरी में उस समय सामने आया जब मिदनापुर के निवासी चंदन माझी ने एक बैक डेटेड शिकायत दर्ज कराई कि कुछ पुलिस वालों ने उनसे बिना पैसे दिए 375 ग्राम सोना लिया. ये शिकायत भारती घोष के इस्तीफा देने के कुछ सप्ताह बाद दर्ज की गई. इसके बाद जिला अदालत में एक जांच शुरू की गई. सीआईडी का कहना है कि घोष, उनके पति और अन्य पुलिस वालों के मकानों से उसने 2.4 करोड़ रुपये नकद और सोना बरामद किया. 

भारती घोष ने सीआईडी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों ने इनकार किया है. उनका आरोप है कि सीआईडी राज्य सरकार के इशारों पर उन्हें फंसाने की कोशिस कर रही है. उनका कहना है कि उनके पास से मिली संपत्ति उन्हें अपने पिता से मिली है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है. भारती को एक समय ममता बनर्जी का करीबी माना जाता था, हालांकि मुकुल राय के पार्टी छोड़ने कर बीजेपी में शामिल होने के बाद माना गया कि भारती मुकुल राय की मदद कर रही हैं. इस कारण तथाकथित रूप से उन्हें सरकार की नाराजगी का सामना करना पड़ा और उनका ट्रांसफर जंगलमहल से पश्चिम मिदनापुर जिले में कर दिया गया.



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