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RBI vs Centre | मोदी सरकार और आरबीआई में चल रही है तकरार, ये अनबन बंद नहीं हुई तो सरकार पहली बार कर सकती है सेक्शन 7 का इस्तेमाल?


न्यूज डेस्क। इन दिनों मोदी सरकार और केंद्रीय रिजर्व बैंक (RBI) के बीच तनातनी चल रही है। रिजर्व बैंक द्वारा असंतोष सार्वजनिक करने से सरकार काफी खफा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार रिजर्व बैंक की स्वायत्ता और आजादी का सम्मान करती है लेकिन उन्हें भी अपनी जिम्मेदारी समझनी पड़ेगी।

पीएमओ के अधिकारी ने कहा, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आरबीआई ने इसे सार्वजनिक किया। केंद्रीय बैंक से यह उम्मीद नहीं थी। 12 नवंबर को संसदीय समिति के सामने उन्हें तीखे सवालों का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने बीते शुक्रवार को एक कार्यक्रम में अर्जेंटीना का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां केंद्रीय बैंक की आजादी कम करने से इकोनॉमी चौपट हो गई। अधिकारी गवर्नर उर्जित पटेल को इस विवाद के लिए जिम्मेदार मानते हैं।

सरकार कर सकती है सेक्शन 7 का इस्तेमाल

– इस खींचतान के चलते कयास लगाया जा रहा है कि आरबीआई के गवर्ननर उर्जित पटेल अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि आरबीआई एक्ट के तहत केंद्रीय बैंक को दी गई स्वायत्ता का पूरा सम्मान करती है।

– बता दें कि आरबीआई एक स्वायत्ता प्राप्त संस्थान है। यानी वह अपने निर्णय खुद ले सकता है। इसी बीच खबर आई है कि केंद्र सरकार आरबीआई एक्ट के सेक्शन 7 का इस्तेमाल कर सकती है।

– रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 की धारा 7 कहती है, ‘केंद्र सरकार सार्वजनिक हित के लिए बैंक के गवर्नर से मशविरे के बाद समय-समय पर इस तरह के निर्देश दे सकती है।’ इस सेक्शन के तहत केंद्र सरकार जनहित में अहम मुद्दों पर आरबीआई को फरमान दे सकती है। बता दें कि आरबीआई के 83 वर्षों के इतिहास में कभी, किसी सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के सेक्शन 7 का इस्तेमाल नहीं किया।


सरकार के सामने हैं ये चुनौतियां

– मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाना

– बैंकों एवं कारोबारियों पर दबाव कम करना

– आर्थिक वृद्धि को गति देना





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