Home » Special » martin luther the entire story how revolution come in christianity- Navbharat Times Photogallery

martin luther the entire story how revolution come in christianity- Navbharat Times Photogallery


मार्टिन लूथर: एक घटना से कैसे आई ईसाई धर्म में क्रांति, पढ़ें पूरी रोचक कहानी

Web Title:martin luther the entire story how revolution come in christianity

(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

1/7

मार्टिन लूथर: एक घटना से कैसे आई ईसाई धर्म में क्रांति, पढ़ें पूरी रोचक कहानी
16वीं सदी में कैथोलिक चर्च भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए थे। पोप पैसे लेकर पापों के लिए माफीनामा बेचता था। चर्च के भ्रष्टाचार के खिलाफ बगावत की चिंगारी को शोलों में बदलने के लिए जरूरत एक ऐसे इंसान की थी जो भ्रष्टाचार की व्यवस्था के खिलाफ खड़ा हो और उस पर प्रहार करे। लेकिन किसी के लिए ऐसा करना आसान नहीं था। ऐसे में मार्टिन लूथर नाम का एक शख्स उठता है और कैथोलिक चर्च के खिलाफ मोर्चा खोल देता है। चूंकि कैथोलिक चर्च के खिलाफ एक मत ईसाई धर्म में पैदा होता है, इसलिए इस मत का नाम प्रोटेस्टैंटिजम पड़ जाता है यानी प्रोटेस्ट से प्रोटेस्टैनिजम। इस धार्मिक क्रांति को धर्मसुधार का नाम मिलता है। आइए आज हम इस धर्मसुधार आंदोलन और मार्टिन लूथर से जुड़ीं बड़ी बातें जानेंगे और यह भी पढ़ेंगे कि कैसे एक घटना ईसाई धर्म के लिए बड़े क्रांति की वजह बनी…

2/7

​असल नाम नहीं था मार्टिन लूथर

​असल नाम नहीं था मार्टिन लूथर

मार्टिन लूथर का जन्म 10 नवंबर, सन्‌ 1483 को जर्मनी के आइसलेबन शहर में हुआ था। पूरे ईसाई जगत में उनको मार्टिन लूथर के नाम से जाना जाता है। लेकिन उनका असल नाम ‘मार्टिन लूदर’ था। उनके पिता तांबे की खान में मजदूरी करते थे। जिस साल में उन्होंने अपना थीसिस लिखा, उसी साल में अपना सरनेम ‘लूदर’ से बदलकर ‘लूथर’ कर लिया। माना जाता है कि उनका नाम ग्रीक शब्द ‘एरलेथेरियोस’ पर है जिसका मतलब आजादी होता है।

3/7

​घटना जो ईसाई जगत के लिए बड़ी क्रांति की वजह बनी

​घटना जो ईसाई जगत के लिए बड़ी क्रांति की वजह बनी

हम कह सकते हैं कि एक घटना ईसाई जगत के इतिहास में बड़ी क्रांति की वजह बनी। दरअसल मार्टिन लूथर के पिता चाहते थे कि वह लॉ की पढ़ाई करें और परिवार के बिजनस में मदद करें। लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि मार्टिन लूथर दूसरे रास्ते पर चल निकले। जब लूथर 21 साल के थे तो बहुत तेज आंधी में फंस गए और मौत के करीब थे। उन्होंने वर्जिन मैरी की मां सेंट अन्ना से अपनी जान बचाने की प्रार्थना की। उन्होंने वादा किया था कि अगर जिंदा रहे तो मंक यानी साधु बन जाएंगे। लूथर ने अपने वादे पर कायम रहे और दो साल बाद साधु बन गए।

(फोटो: साभार Pinterest)

4/7

​कैथोलिक चर्च का भ्रष्टाचार

​कैथोलिक चर्च का भ्रष्टाचार

उस समय चर्च का भ्रष्टाचार चरम पर था। लोगों के बीच यह बात फैलाई गई थी कि पापियों को मौत के बाद सजा भुगतनी पड़ती है। लेकिन अगर कोई इंसान चर्च की ओर से जारी की जाने वाली माफी कि चिट्ठियां खरीद लें तो उसकी सजा कम हो जाती है। इसकी आड़ में पोप लोगों को लूटता था। इस सबको देखकर मार्टिन लूथर का गुस्सा भड़क गया। उनका मानना था कि इंसान कभी भगवान के साथ किसी तरह का सौदा नहीं कर सकता है। चर्च के अपराध को रोकने के मकसद से उन्होंने 1517 में मशहूर ’95 थीसिस’ लिखा । उन्होंने इसमें चर्च पर जनता को लूटने, गलत शिक्षा देने और अपनी ताकत का नाजायज फायदा उठाने का आरोप लगाया। लूथर ने इसकी प्रतियां विद्वानों और ईसाई धर्मगुरुओं को भेजी। कहा जाता है कि इसके साथ ही 1517 के आसपास ईसाई जगत में धर्मसुधार आंदोलन शुरू हुआ।

5/7

​गुटेनबर्ग प्रेस की अहम भूमिका

​गुटेनबर्ग प्रेस की अहम भूमिका

मार्टिन लूथर से पहले भी कई धर्म सुधारकों ने चर्च की निरंकुशता के खिलाफ बोला था लेकिन उनका संदेश दूर-दूर तक नहीं जा पाया। मार्टिन लूथर के संदेश को दूर-दूर तक पहुंचाने में प्रेस की अहम भूमिका थी। जर्मनी के योहानेस गुटेनबर्ग ने कहीं भी ले जाने वाली प्रिंटिंग प्रेस का ईजाद किया। धीरे-धीरे 1500 तक पूरे जर्मनी और यूरोप में छापाखाने खुल गए। इससे लोगों तक अपना संदेश पहुंचाना आसान हो गया। मार्टिन लूथर की 95 थीसिस को भी छापकर लोगों के बीच बांटा गया। इससे चर्च में सुधार लाने का मामला हर किसी की दिलचस्पी का केंद्र बन गया। प्रेस की बदौलत मार्टिन लूथर की कोशिश ने आंदोलन का रूप ले लिया और वह जर्मनी के सबसे मशहूर आदमी बन गए।

6/7

​क्रिसमस डे की शुरुआत

​क्रिसमस डे की शुरुआत

क्रिसमस डे की शुरुआत भी मार्टिन लूथर के प्रभाव में हुई। धर्मसुधार आंदोलन से पहले ईसाई जगत में यीशू मसीह के जन्मदिन का जश्न नहीं मनाया जाता था। 6 दिसंबर को जनवरी में सेंट निकोलस डे मनाया जाता था। ऐसा माना जाता था कि इस दिन ही तीन महान विद्वान लोगों ने बेथलेहम का भ्रमण किया था। सेंट निकोलस को इतना सम्मान दिए जाने पर लूथर नाराज थे। इस वजह से प्रोटेस्टैंट मत के अंदर सेंट निकोलस डे का महत्व धीरे-धीरे घटना गया। उसकी जगह पर 24 दिसंबर की पूर्व संध्या पर जर्मनी और कई अन्य यूरोपी देशों में यूशी मसीह के जन्मदिन का जश्न मनाया जाने लगा।

7/7

​अच्छे अनुवादक और लेखक

​अच्छे अनुवादक और लेखक

मार्टिन लूथर एक अच्छे लेखक के साथ-साथ एक अच्छे अनुवादक भी थे। कहा जाता है कि उन्होंने न्यू टेस्टामेंट को महज 11 दिनों में ग्रीक भाषा से जर्मन भाषा में अनुवाद कर दिया था। उसके बाद उन्होंने हिब्रू से ओल्ड टेस्टामेंट का अनुवाद किया। वैसे ऐसा नहीं है कि वह पहले शख्स थे जिन्होंने बाइबिल का जर्मन अनुवाद किया बल्कि उनकी भाषा बहुत आसान थी। उनकी भाषा ऐसी थी कि सबको समझ में आती थी। वह लिखने की शैली, लय और शब्दों के बीच अच्छा तालमेल बिठाना जानते थे।

(फोटो: साभार Pinterest)

FROM WEB

FROM NAVBHARAT TIMES





Source link

Leave a Reply

%d bloggers like this: