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K9 Vajra And M777 Howitzer Guns Joined The Indian Army Will Be Able To Capture The Enemy At A Considerable Height Kp | काफी ऊंचाई पर बैठे दुश्मन को भी निशाने पर ले सकेंगी K9 वज्र और M777 होवित्जर तोपें, भारतीय सेना में हुई शामिल


काफी ऊंचाई पर बैठे दुश्मन को भी निशाने पर ले सकेंगी K9 वज्र और M777 होवित्जर तोपें, भारतीय सेना में हुई शामिल

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और सेना प्रमुख बिपिन रावत ने शुक्रवार को नाशिक के देवलाली आर्टिलर्री सेंटर (तोपखाने) में नए ‘K9’वज्र और M777 होवित्जर तोपों को सेना में शामिल किया.
शुक्रवार की सुबह ही रक्षा मंत्री ने ट्वीट कर के इसकी जानकारी दी थी कि तीन M777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर और 10’K9’वज्र आधुनिक गन सिस्टम्स को सेना में शामिल किया जाने वाला है. इस तोप को आसानी से पहाड़ी इलाकों में भी तैनात किया जा सकता है.

क्या है इनकी खासियत?

बोफोर्स तोप के बाद भारतीय सेना को 30 वर्षों के बाद यह तोप मिला है. दुश्मन देशों की तरफ से बढ़ रही चुनौतियों के बीच इन तोपों का भारतीय सेना में शामिल होने से सेना की ताकत और बढ़ गई है. पाकिस्तान से करगिल युद्ध के समय ही इन तोपों की जरूरत महसूस की गई थी. अब इतने सालों बाद सेना की यह जरूरत पूरी हो गई है.

इन तोपों की खासियत यह है कि अगर दुश्मन काफी ऊंचाई पर भी बैठा हो, तो भी उसे निशाने पर लिया जा सकता है.

K9 तोपों की यह खासियत है कि इनकी रेंज 28-30 किलोमीटर है. ये 30 सेकंड में तीन गोले दागने में सक्षम हैं.

वहीं दमदार M777 होवित्जर तोप 30 किलोमीटर की दूरी तक वार कर सकती है. इसे प्लेन या हेलिकॉप्टर के जरिए स्थानांतरित भी किया जा सकता है. मौजूदा समय में 52 कैलिबर की M777 तोप केवल अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के पास है. अब यह भारतीय सेना के पास भी होगी.

2020 तक भारतीय सेना में 100 K9 वज्र होंगे शामिल

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने बताया कि K9 वज्र को 4,366 करोड़ रुपए की लागत से शामिल किया गया है. कुल 100 तोपों में से 10 तोप इसी महीने बनकर तैयार हो जाएंगे. वहीं अगले साल नवंबर तक 40 और नवंबर 2020 तक 50 अन्य तोप बनकर तैयार हो जाएंगे.सेना एम777 M777 होवित्जर की सात रेजिमेंट्स भी बढ़ाने जा रही है.

इसके साथ ही एक तीसरा उपकरण भी आज शामिल किया जा रहा है- कॉमन गन टॉवर. 6×6 वाला यह वाहन क्रॉस देश क्षमता रखता है. यह मध्यम बंदूकें को खींचने के लिए आवश्यक है. ये कॉमन गन टावर्स भारतीय कंपनी अशोक लेलैंड द्वारा बनाए जाते हैं.



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