Home » World » Exemption From India For The Development Of Chabahar Port In Iran With Some Restrictions | ईरान में चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए अमेरिका ने कुछ प्रतिबंधों से भारत को दी छूट

Exemption From India For The Development Of Chabahar Port In Iran With Some Restrictions | ईरान में चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए अमेरिका ने कुछ प्रतिबंधों से भारत को दी छूट


अमेरिका ने ईरान में विकसित किए जा रहे स्ट्रैटेजिक विजन से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह और इसे अफगानिस्तान से जोड़ने वाली रेलवे लाइन के निर्माण के लिए भारत को कुछ प्रतिबंधों से छूट दे दी है. विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी.

ट्रंप प्रशासन का यह फैसला दिखाता है कि ओमान की खाड़ी में विकसित किए जा रहे इस बंदरगाह में भारत की भूमिका को अमेरिका मान्यता देता है. इसे इस तरह समझा जा सकता है कि एक दिन पहले ही ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए और छूट देने में भी उसका रुख बेहद सख्त है. यह बंदरगाह युद्ध ग्रस्त अफगानिस्तान के विकास के लिए सामरिक दृष्टि से बहुत जरूरी है.विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने पीटीआई-भाषा को बताया कि गहन विचार के बाद विदेश मंत्री ने 2012 के ईरान स्वतंत्रता और प्रसार रोधी अधिनियम के तहत लगाए गए कुछ प्रतिबंधों से छूट देने का प्रावधान किया है जो चाबहार बंदरगाह के विकास, उससे जुड़ी एक रेलवे लाइन के निर्माण और बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान के इस्तेमाल वाली, प्रतिबंध से अलग रखी गई वस्तुओं के नौवहन से संबंधित है. साथ ही यह ईरान के पेट्रोलियम उत्पादों के देश में निरंतर आयात से भी जुड़ा हुआ है.

अमेरिका ने सोमवार को ईरानी शासन के रवैये में बदलाव लाने के मकसद से उस पर ‘अब तक के सबसे कड़े’ प्रतिबंध लगा दिए थे. इन प्रतिबंधों में ईरान का बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र शामिल है. साथ ही इसमें ईरान से तेल खरीदने वाले देशों और यूरोप, एशिया समेत कहीं की भी कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है.

हालांकि विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि आठ देशों- भारत, चीन, इटली, तुर्की, यूनान, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान को अस्थाई रूप से ईरानी तेल खरीदने की इजाजत है क्योंकि उन्होंने खाड़ी देश से तेल खरीदने में ‘महत्वपूर्ण कटौती’ की है.

ईरान पर फिर से सभी प्रतिबंध लगाने के बाद चाबहार बंदरगाह के भविष्य पर सवाल पूछे जाने पर प्रवक्ता ने कहा, ‘यह छूट अफगानिस्तान के आर्थिक विकास और पुनर्निर्माण सहायता से जुड़ी हुई है. ये गतिविधियां अफगानिस्तान के विकास और मानवीय राहत के लिए जारी समर्थन के लिहाज से अहम हैं.’



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