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diwali 2018 health tips for kids old age person and pregnant women


Dainik Bhaskar

Nov 06, 2018, 04:16 PM IST

हेल्थ डेस्क. दीपावली स्वादिष्ठ पकवानों, रोशनी और पटाखों का पर्व है। सामान्य व्यक्ति को इन पांच दिनों में मोटापे या शुगर की चिंता किए बगैर सबकुछ खाना-पीना चाहिए। बस, जरूरत है तो छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने की। खासकर जिन्हें पहले से ही कुछ न कुछ सेहत से जुड़ी समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी रखनी चाहिए ताकि त्योहार के दौरान और उसके बाद भी वे स्वस्थ रहें। गर्भवती माताओं और छोटे बच्चों को भी धुएं से बचाकर रखना चाहिए। डॉ. अव्यक्त अग्रवाल बता रहे हैं दिवाली में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए…

5 तरह के लोग रखें विशेष सावधानी


  1. अस्थमा एवं एलर्जी के मरीज

    • जिस समय दिवाली का त्योहार आता है, उस दौरान वातावरण में भी ठंडक बढ़ जाती है। इसलिए यह मौसम वैसे भी अस्थमा और एलर्जी के मरीजों के लिए खतरनाक होता है।
    • दिवाली के त्योहार में वातावरण में धुआं और बढ़ जाता है। धुएं से नाक की एलर्जी के अथवा अस्थमा के मरीज़ों को काफी दिक्कतें होती हैं। भले ही ऐसे मरीजों को दीपावली के दिन उतनी दिक्कत न हो, लेकिन अगले कुछ दिनों में समस्या बढ़ जाती है। इसलिए सीधे धुएं के संपर्क में आने से बचना चाहिए।
    • विटामिन डी और विटामिन सी युक्त पोषण लेते रहें। विटामिन डी के लिए सुबह की धूप, दूध, पनीर, मशरूम और विटामिन सी के लिए ताज़े नींबू, मौसंबी, संतरा, कीवी फूड इत्यादि ले सकते हैं। 

       


  2. डायबिटीज के मरीज़

    • जिन्हें शुगर है, उन्हें अपनी सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत है। ऐसे लोगों को त्योहार के लिए अपना रुटीन नहीं बदलना चाहिए। त्योहार के दिन भी मॉर्निंग वॉक, एक्सरसाइज, योग आदि जारी रखना चाहिए।
    • हाई कैलोरी युक्त मिठाइयों और नमकीन से जितना संभव हो सके, बचने का प्रयास करना चाहिए। थोड़ी मात्रा में शुगर फ्री मिठाइयां खा सकते हैं। जरूरत होने पर डॉक्टर से मिलने में भी हिचकिचाना नहीं चाहिए। 

       


  3. बीपी के मरीज़

    • जो लोग हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, उन्हें मिठाइयों से तो उतनी दिक्कत नहीं होती, जितनी कि नमकीन से। बीपी के मरीजों को नमक अवॉइड करना पड़ता है। ऐसे में इन्हें यथासंभव नमकीन कम से कम खाना चाहिए।
    • नियमित व्यायाम, मैडिटेशन इत्यादि आपको वैसे भी करते रहना चाहिए, जैसा कि आप करते आ रहे हैं। इस पर दिवाली के त्योहार का असर नहीं पड़ना चाहिए।


  4. गर्भवती महिलाएं

    • गर्भस्थ शिशु में सुनने की क्षमता अठारह हफ्तों के बाद से ही विकसित हो जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाएं तेज़ आवाज वाले पटाखों के पास न जाएं और साथ ही सीधे धुएं से दूर रहें।
    • बेहतर रहेगा कि मास्क आदि का प्रयोग करें। और हां, अगर उन्हें कोई बीमारी नहीं है, तो संतुलित आहार के साथ ही वे सभी पकवान खा सकती हैं। इनके लिए किसी तरह के परहेज की आवश्यकता नहीं है। 

       


  5. 3 साल से कम उम्र के बच्चे

    अगर बच्चा तीन साल से छोटा है तो उसे धूल-धुएं और प्रदूषण से बचाया जाए क्योंकि तीन साल तक होते-होते बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं। लेकिन अगर बच्चा बड़ा और स्वस्थ है तो उसे रौशनी, पटाखों, मिठाइयों का अनुभव करने दीजिए।


    पटाखे सुरक्षित रहकर साथ रहकर ही चलाएं। प्रतिवर्ष पटाखों से जलने वाले बच्चों के केस अस्पतालों में आते रहते हैं। अतः उन्हें पटाखों के साथ अकेला न छोड़ें। 

     





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