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BJP Observer meets Goa’s leaders on political condition


पणजी : गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर इलाज के लिए दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती हैं. बीजेपी मनोहार पर्रिकर के स्वस्थ होने तक गोवा में मुख्यमंत्री पद के लिए विकल्प तलाश रही है. इसी क्रम में राज्य की राजनीतिक स्थिति का जायजा लेने के लिए सत्तारूढ़ बीजेपी के तीन केंद्रीय पर्यवेक्षकों की एक टीम रविवार को यहां पहुंची. दूसरी ओर विपक्षी कांग्रेस ने कहा है कि वह घटनाक्रम पर नजर रख रही है. पर्रिकर लंबे समय से बीमार चल रहे हैं. उनका अमेरिका में तीन महीने लंबा इलाज चला था. 

बीजेपी ने अपने राष्ट्रीय महासचिवों बीएल संतोष और राम लाल और गोवा के प्रभारी विजय पुराणिक को राजनीतिक स्थिति का जायजा लेने के लिए भेजा है. पार्टी यहां क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सत्ता में आई है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष विनय तेंदुलकर ने बताया कहा कि “वे रविवार और सोमवार को बीजेपी नेताओं और गठबंधन सहयोगियों – गोवा फॉरवर्ड पार्टी, महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी और निर्दलीय विधायकों के साथ बैठकें करेंगे.” 

केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने रविवार को शहर के एक होटल में पार्टी के विधायकों और गोवा बीजेपी प्रमुख तेंदुलकर तथा दक्षिणी गोवा से सांसद नरेंद्र सवाईकर से मुलाकात की. बैठक के बाद गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा कि उन्होंने मौजूदा राजनीतिक स्थिति के बारे में अपनी राय दी और अब पार्टी को फैसला करना है. राणे ने हालांकि बैठक का ब्यौरा देने से इंकार कर दिया.

विश्वजीत राणे ने कहा, ‘हमने उन्हें तथ्यों से अवगत कराया. हम में से हर एक की अपनी राय है तथा हमने उन्हें उनसे अवगत कराया. क्या बातचीत हुई, यह सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा.’ 

गोवा विधानसभा के उपाध्यक्ष माइकल लोबो ने संवाददाताओं से कहा कि बैठक सरकार के कामकाज और पर्रिकर की बीमारी पर केंद्रित रही. लोबो ने कहा, ‘पार्टी आलाकमान द्वारा भेजे गए पर्यवेक्षक स्थिति का जायजा ले रहे हैं. उन्हें आलाकमान को रिपोर्ट करने दीजिए और समस्या के समाधान के लिए हमारे पास आने दीजिए.’ 

लोबो ने कहा, ‘जीएफपी और एमजीपी को बीजेपी में विलय का प्रस्ताव दिया जाएगा. इसके बाद ही हम दूसरे मुद्दों पर बात करेंगे जैसे कि कौन अगला मुख्यमंत्री होगा या कौन प्रभार संभालेगा या इससे संबंधित कुछ और.’ 

40 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के अभी 14 विधायक हैं जबकि जीएफपी और एमजीपी के तीन-तीन विधायक हैं. उसे तीन निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है. कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के पास एक विधायक है.

इस बीच, कांग्रेस ने रविवार को कहा कि वह घटनाक्रम पर नजर रख रही है और गोवा में सरकार बनाने की संभावनाएं तलाश सकती है लेकिन उसने कहा कि वह राज्य के हितों के साथ समझौता नहीं करेगी. अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सचिव एवं गोवा में पार्टी के प्रभारी ए. चेल्लाकुमार ने कहा, ‘हमारा रुख बहुत स्पष्ट है. निश्चित तौर पर हम सभी संभावनाओं को टटोलेंगे लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हम गोवावासियों की विचारधारा या हितों से समझौता करके ऐसा करेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘हमें गोवा के लोगों के हितों से समझौता करके सत्ता पाने की जल्दबाजी नहीं है. कांग्रेस लोगों के प्रति जवाबदेह है.’ 

कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य के घटनाक्रम पर नजर रख रही है. उन्होंने कहा, ‘हमारे सभी विधायक एकजुट हैं. हम अभी देख रहे हैं कि सत्तारूढ़ खेमे में क्या चल रहा है. अंदरुनी कलह शुरू हो गई है. कैबिनेट मंत्रियों ने एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने शुरू कर दिए हैं.’ 



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