Home » India » 'हम दीये बेच रहे हैं, मगर कोई नहीं खरीद रहा…' मासूम बच्चों का जवाब सुन दारोगा ने निकाली ऐसी तरकीब, देखते ही देखते बिक गए सारे दीये

'हम दीये बेच रहे हैं, मगर कोई नहीं खरीद रहा…' मासूम बच्चों का जवाब सुन दारोगा ने निकाली ऐसी तरकीब, देखते ही देखते बिक गए सारे दीये






नेशनल डेस्क/अमरोहा: अपनी कार्यप्रणाली को लेकर बदनाम यूपी पुलिस का दीवाली पर एक बेहद ही मानवीय चेहरा सामने आया है, जब यूपी के अमरोहा में पुलिस वालों ने दिवाली पर दीये बेच रहे गरीब बच्चों की मदद कर लाखों लोगों का दिल जीत लिया। उनकी एक फोटो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में दो छोटे-छोटे बच्चे बैठ कर मिट्टी के दीये बेचते हुए दिखाई दे रहे हैं वहीं उनके सामने पुलिस वाले खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। दरअसल इस घटना को एक फेसबुक यूजर ने अपनी बॉल पर शेयर किया था। जिसके बाद से लोग पुलिसवालों की तारीफ कर रहे हैं। सबसे पहले भास्कर डॉट कॉम ने ही इस खबर को पब्लिश किया था, जिस पर अकेले फेसबुक पर एक दिन में एक लाख से ज्यादा लाइक, 11 हजार शेयर और करीब 3 हजार कमेंट मिल चुके हैं, जिनमें लोग पुलिसवालों को सैल्यूट कर रहे हैं।

एक यूजर ने शेयर किया था वाक्या
एक यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा- 'दिवाली का बाजार सजा है। तभी पुलिस का एक दस्ता बाजार का मुआयना करने पहुंचता है। चश्मदीद का कहना है कि दस्ते में सैद नगली थाना के थानाध्यक्ष नीरज कुमार थे। दुकानदारों को दुकानें लाइन में लगाने का निर्देश दे रहे थे, उनकी नजर इन दो बच्चों पर गई। जो जमीन पर बैठे कस्टमर का इंतजार कर रहे हैं। चश्मदीद का कहना है कि मुझे लगा अब इन बच्चों को यहां से हटा दिया जाएगा। बेचारों के दीये बिके नहीं और अब हटा भी दिए जाएंगे। रास्ते में जो बैठे हैं…।

पुलिसवालों से बोले बच्चे- हम गरीब हैं, कैसे मनाएंगे दिवाली
थानाध्यक्ष बच्चों के पास पहुंचे। उनका नाम पूछा। पिता के बारे में पूछा। बच्चों ने बेहद मासूमियत से कहा, 'हम दीये बेच रहे हैं। मगर कोई नहीं खरीद रहा। जब बिक जाएंगे तो हट जाएंगे। अंकल बहुत देर से बैठे हैं, मगर बिक नहीं रहे। हम गरीब हैं। दिवाली कैसे मनाएंगे?' यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा- 'चश्मदीद का कहना है बच्चों की उस वक्त जो हालत थी बयां करने के लिए लफ्ज नहीं हैं। मासूम हैं, उन्हें बस चंद पैसों की चाह थी, ताकि शाम को दिवाली मना सकें।

थाना प्रभारी ने कहा- हम खरीदेंगे दीये
नीरज कुमार ने बच्चों से कहा, दीये कितने के हैं, मुझे खरीदने हैं…। थानाध्यक्ष ने दीये खरीदे। इसके बाद पुलिस वाले भी दीए खरीदने लगे। इतना ही नहीं, फिर थाना अध्यक्ष बच्चों की साइड में खड़े हो गए। बाजार आने वाले लोगों से दीये खरीदने की अपील करने लगे। बच्चों के दीए और पुरवे कुछ ही देर में सारे बिक गए। जैसे जैसे दीये बिकते जा रहे थे। बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं था।' 'जब सब सामान बिक गया तो थाना अध्यक्ष और पुलिस वालों ने बच्चों को दिवाली का तोहफा करके कुछ और पैसे दिए। पुलिस वालों की एक छोटी सी कोशिश से बच्चों की दिवाली हैप्पी हो गई। घर जाकर कितने खुश होंगे वो बच्चे। आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते। मुझे लगता है, बच्‍चों को भीख देने से बेहतर है कि अगर वो कुछ बेच रहे हैं तो खरीद लीजिए'

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