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स्वामी सानंद जैसे समर्पित लोगों का बलिदान ज़ाया नहीं जाना चाहिए



पिछले महीने के आखिरी सप्ताह में ही उनसे मिलना हुआ था. तब इस बात की उम्मीद भी नहीं थी कि ये सब इतना जल्दी हो जाएगा. जल्दी वैसे नहीं, क्योंकि पिछले 112 दिनों से वो भूख हड़ताल पर बैठे थे. स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद यानि प्रोफेसर जीडी अग्रवाल जी से जब मिलने पहुंचे तो पहले तो उन्होंने इशारे से बैठने को कहा और शांति से किसी शून्य में देखने लगे. हम भी चुप थे और वो भी चुप थे, लेकिन इस चुप्पी में शायद एक बहुत बड़ी चीख थी. एक नैराश्य का वार्तालाप था. जब हमने उनसे कहा कि लोग समर्थन में बात कर रहे हैं जल्दी ही कुछ हल निकलना चाहिए तो उन्होंने बड़ी ही तल्खी के साथ कह दिया था कि ‘अब मुझे किसी से कोई उम्मीद नहीं है. आने वाली 9 तारीख को नवरात्र शुरू होते ही मैं पानी भी त्याग दूंगा. अब मैं बस यही चाहता हूं कि ये प्राण निकलें. जब जिंदगी नहीं रहती है तो सारे प्रश्न खत्म हो जाएंगे.’



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