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मेडिटेशन करते हुए बौद्ध भिक्षु ने की थी चाय की खोज आैर आइस टी की कहानी इससे भी रोचक है





लाइफस्टाइल डेस्क. सुबह उठते ही हम सबको चाय चाहिए। आखिर हमारी जिंदगी में चाय आई कैसे? यह जानना भी काफी दिलचस्प है। चाय की खोज का श्रेय बोधिधर्म नामक एक बौद्ध भिक्षु को जाता है। ये बोधिधर्म वही हैं, जिन्होंने शाओलिन कुंगफू नामक मार्शल आर्ट का आविष्कार किया था। और मजेदार बात, बोधिधर्म मूलत: भारत के थे। उनका जन्म दक्षिण भारत के पल्लव शासकों के किसी राजपरिवार में हुआ था। वे बाद में हिंदू से बौद्ध बन गए। उनके गुरु ने धर्म प्रचार के लिए उन्हें चीन जाने के निर्देश दिए तो वे 475 ईस्वी में चीन पहुंच गए। चीन में बोधिधर्म मेडिटेशन सिखाने लगे। उनका यही मेडिटेशन चाय की खोज की वजह बना। शेफ एंड फूड राइटर हरपाल सिंह सोखी से जानिए पूरी कहानी

    • चीन में इसको लेकर एक किंवदंती भी प्रसिद्ध है। इस किंवदंती के अनुसार एक बार बोधिधर्म ने 9 साल तक बगैर पलकें झपकाए ध्यान करने का संकल्प लिया। वे सालों इसमें सफल रहे। लेकिन उनका यह संकल्प पूरा होने के कुछ दिन पहले ही उन्हें नींद लग गई। उनका संकल्प टूट गया। नींद खुलते ही उन्होंने गुस्से में अपनी पलकें उखाड़कर जंगल में फेंक दी।
    • कुछ दिनों बाद वे वापस उसी जगह आए तो उन्हें वहां कुछ झाड़ियां नजर आईं। उन्होंने उसके कुछ पत्तों को तोड़कर चखा तो उनमें अचानक एक नई ऊर्जा का संचार हो गया। यही पत्ते चाय थी। अब जरा किंवदंती को अगर अलग रख दें। तो कुछ ऐसा हुआ होगा कि ध्यान के संकल्प के समय बोधिधर्म को नींद आने लगी होगी। इससे बचने के लिए उन्होंने आस-पास उगी झाड़ियों के पत्तों को चखा होगा। इससे उनकी नींद भाग गई होगी। बस, यही से चाय की खोज हुई होगी।
    • चाय की खोज की एक और कहानी भी प्रचलित है। एक बार चीनी शासक शेन नुंग तपती धूप में एक पेड़ के नीचे आराम फरमा रहे थे। मौसम में सुस्ती छाई हुई थी। तभी उन्होंने एक सेवक से अपने लिए पानी गर्म करके लाने को कहा। लेकिन पानी गर्म करते समय हवा में कहीं से कुछ पत्तियां उड़कर उबलते हुए पानी में गिर गईं। उनका सेवक थोड़ा आलसी किस्म का था। तो उसने उन पत्तियों को ही छानकर वह पानी शेन नुंग को पिला दिया।
    • नुंग को वह पानी पीते ही ताजगी महसूस हुई तो उन्होंने सेवक को बुलाया। सेवक ने डरते-डरते सच बता दिया। पर नुंग बड़े खुश हुए और उन्होंने ऐसे पत्तों को ढूंढने का हुक्म सुना दिया। इस तरह शेन नुंग ऐसे पहले शख्स बने जिन्होंने आफ्टरनून टी का स्वाद चखा।
    • चीनी बौद्ध भिक्षु लू यू (733-804) ने तांग शासनकाल के दौरान पहली बार चाय का दस्तावेजीकरण किया। इसमें उन्होंने न सिर्फ चाय के प्रकारों के बारे में बताया, बल्कि बनाने के तरीकों और चाय की फिलोसॉफी पर भी लिखा।
    • सुंग शासनकाल (960-1280) के दौरान चाय को लेकर कई तरह की कविताएं लिखी गईं। बाद में विक्टोरिया काल में ब्रिटिश और यूरोपीय लेखकों, कलाकारों और दार्शनिकों ने चाय के कलात्मक, दार्शनिक और भावनात्मक पहलुओं को उजागर किया।
  1. और चलते-चलते यह भी जान लेते हैं कि आखिर आइस्ड टी कैसे अस्तित्व में आई। बात 1904 में अमेरिका के मिसोरी में एक चायवाला चाय बेच रहा था। गर्मी काफी थी। इसलिए बहुत कम लोग चाय पीने में रुचि ले रहे थे। अचानक चायवाले को एक दिल्लगी सूझी। वह पास में आइसक्रीम बेच रहे एक आइसक्रीम वाले से कुछ बर्फ मांगकर ले आया। उसने एक पॉट में उबले चाय के पानी में बर्फ डाल दी और उसे दो-चार ग्राहकों को बस यूं ही टेस्ट चेंज करने के नाम पर सर्व कर दी। पर ग्राहकों को तो उसका स्वाद बड़ा पसंद आया। और देखते ही देखते उसकी आइसटी फेमस हो गई। इस तरह कोल्ड टी प्रचलन में आई।

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      invention of tea by buddha monk and Chinese dictator



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